नई दिल्ली, 20 जून.
भारत के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो केवल सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से पानी के अणुओं के विभाजन द्वारा हरित हाइड्रोजन का उत्पादन कर सकता है।
ग्रीन हाइड्रोजन को सबसे स्वच्छ ईंधनों में से एक माना जाता है, जो उद्योगों एवं वाहनों को कार्बन मुक्त करने और अक्षय ऊर्जा को संग्रहीत करने में सक्षम है। किंतु, अब तक कोई मापन-योग्य और किफायती उत्पादन विधि हमारी पहुंच से दूर थी.
इस दिशा में एक ऊंची छलांग लगाते हुए सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने अगली पीढ़ी का उपकरण विकसित किया है, जो जीवाश्म ईंधन या महंगे संसाधनों पर निर्भर हुए बिना, केवल सौर ऊर्जा और पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में मौजूद सामग्रियों का उपयोग करके पानी के अणुओं के विभाजन द्वारा हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करता है।
डॉ. आशुतोष के. सिंह के नेतृत्व में, अनुसंधान दल ने एक अत्याधुनिक सिलिकॉन-आधारित फोटोएनोड को एक अभिनव एन-आई-पी हेटेरोजंक्शन आर्किटेक्चर का उपयोग करके डिजाइन किया, जिसमें स्टैक्ड एन-टाइप टीआईओ2, आंतरिक (अनडॉप्ड) एसआई, और पी-टाइप एनआईओ सेमीकंडक्टर परतें शामिल हैं, जो चार्ज पृथक्करण और परिवहन दक्षता को बढ़ाने के लिए एक साथ काम करते हैं।
सामग्री को मैग्नेट्रॉन स्पटरिंग का उपयोग करके जमा किया गया था। यह इनोवेशन प्रयोगशाला में मिली सफलता से कहीं अधिक है। इस डिवाइस ने क्षारीय परिस्थितियों में 10 घंटे से अधिक समय तक लगातार काम किया और इसके प्रदर्शन में केवल 4 प्रतिशत गिरावट आई, जो कि फोटो-इलेक्ट्रो-केमिकल सिस्टम में एक दुर्लभ उपलब्धि है।
यह नया उपकरण कई कारणों से आकर्षक है, जिसमें उच्च दक्षता, कम ऊर्जा इनपुट, मजबूत स्थायित्व और किफायती सामग्री शामिल हैं, ये सभी एक पैकेज में हैं।
डॉ. सिंह ने इस कामयाबी पर कहा, "स्मार्ट सामग्रियों का चयन करके और उन्हें एक हेटेरोस्ट्रक्चर में संयोजित करके, हमने एक ऐसा उपकरण बनाया है जो हमें किफायती, बड़े पैमाने पर सौर-से-हाइड्रोजन ऊर्जा बनाकर देता है।"
उनकी इस उपलब्धि को रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री द्वारा प्रकाशित जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया है. अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आगे चलकर यह तकनीक घरों से लेकर कारखानों तक, हाइड्रोजन-आधारित ऊर्जा प्रणालियों को ईंधन दे सकती है.
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